ओ वेणु के मतवाले!
मैं बन जाऊं वेणु तेरी!
करूं विचुम्बित अधर ये तेरे
पुलक उठें प्रश्वांस से फेरें
गूंज-गूंज रग-रागिनियां;
विरस में रस जावे प्याले!
ओ वृन्दाविपिन वाले!
मैं बनूं विपिन-रेणु तेरी!
रंगीन तू कर दे कण-कण तल
धुल जाये अचल-उर यह चंचल
खिला 'कमल-लीला' मुझमें;
हे नि:सीम, करुणा वाले!
ओ मोहक आनन वाले!
मतवाले! ओ मतवाले!
—अनमोल
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