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क्या अब सुनने में मुझको आ रहा है

                
                                                         
                            क्या अब सुनने में मुझको आ रहा है
                                                                 
                            
कि मुझको खोकर वो पछता रहा है

कल से जाने मुझको ये क्या हो गया
क्यों दिल अब मेरा बैठा जा रहा है

उसकी नज़रों से जब मैं गिर चुका हूं
क्यों अब मिलने से वो घबरा रहा है

कल हम दिल से बैठे थे भूल जिसे
वो क्यों ख्वाबों में मेरे आ रहा है

जिसने दानिस्ता हमको छोड़ दिया
अब वो क्यों नगमें मेरे गा रहा है।
-अनमोल
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
36 मिनट पहले

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