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हमारी बात ही सबसे सही है

                
                                                         
                            फरेबी इंसानों से क्यूं तुम्हारी दोस्ती है।
                                                                 
                            
रखी है आस्तीन में छिपाकर दुश्मनी है।
सपने सुनहरे क्यूं आंखों में सजाए हो।
दुःख से भरी जब सारी तुम्हारी जिंदगी है।
है नहीं इंसान कोई उससे बड़ा झूठा।
हर बात जिसकी सच तुमने मान ली है।
वो भला आखिर करेगा क्यूं तुम्हारा।
आदमी सबसे अधिक वो मतलबी है।
कर रहा है जो तुमसे भलाई का दिखावा।
पर वो नहीं अच्छा जरा भी आदमी है।
दिलों की बद्दुआएं ही करेंगी खत्म उसको।
हर तरफ उसके भले ही आज बेहद रौशनी है।
मानते हैं उसको गलत जमाने के लोग सारे।
याद रख लो यह हमारी बात ही सबसे सही है।
-अर्द्धचंद्रधारी त्रिपाठी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 घंटे पहले

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