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जगबीती

                
                                                         
                            राजकुमार का भाग्य तभी
                                                                 
                            
राजमहल में रहता हो
और वैष्णव का भाग्य तभी
जब कोठी में रहता हो
नहीं हृदय का हाल बताते
लाचारी के मारे
नहीं बसीठी करते सज्जन
ईमान धर्म का चोला डारे
माथे की हर सिकन बताती
और बताती मेहनत
मत देखो तुम रूप ,
रंग ,भाषा व सेहत
करते कार्य न सूझे उसको
लगन लगी में करता धावा
कैसे रूप रंग व भाषा
कैसे करे छलावा
भर प्रपत्र पाए पद सबने
जोर शोर पैसे का
पढ़ना और पढ़ाना समझा
खेल सदा पैसे का
खारे सागर से आँसू उसके
और खारा सा पसीना
उस सागर में अमृत का घट
ऐसा आनंद कही ना
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42 मिनट पहले

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