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उम्मीद का चिराग

                
                                                         
                            तार सारे टुट गये, उलझे-उलझे हैं पड़े
                                                                 
                            
उनको सजा रहा हूँ, गीत नया गा रहा हूँ।
मुझको कोई गम नहीं इन हवाओं का
वो बहती हैं तो बहा करें।
डर कहाँ मुझे हवाओं का
मैं तुफान में दीये जलाता हूँ
गीत नया गाता हूँ।
शौक कहाँ मुझे फुलों का,
दर्द से अपनी यारी है
दर्द के सितार पे, साज नई सजाता हूँ
गीत नया गाता हूँ।
सर से पाँव तक जकड़ा हूँ
उम्मीदों के बोझ तले
हर किसी के खुशी का
सामान जुटाता हूँ।
गीत नया गाता हूँ।
— अमित
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2 घंटे पहले

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