नेताजी अपने
वादे से मुकरे ।
क्षेत्र के लोग
इस बात से भुकरे।।
नेताजी ने
स्थिति को भाँप कर
उनकी कुछ माँगें
पूरी कर दीं।
उनकी झोली
खुशियों से भर दी।।
चारों दिशाओं में
नेताजी का
नाम हो गया।
मैंने कहा -
कुछ नहीं
मेंढकी को
जुकाम हो गया।।
-अविनाश ब्यौहार
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