सुना है खुदा के दरबार से कुछ फरिश्ते फरार हो गए,
कुछ तो वापस लौट गए और कुछ हमारे यार हो गए।
वो आए थे बनकर अजनबी मेरी वीरान दुनिया में,
देखते ही देखते वो मेरी खुशियों के हकदार हो गए।
दुनिया ढूंढती रही जिन्हें आसमानों की हदों में,
वो चुपके से आकर मेरी पलकों के पहरेदार हो गए।
उनकी हंसी में खनक थी ऐसी, जैसे कोई रूहानी साज़,
उनसे मिलकर हम भी मोहब्बत के तलबगार हो गए।
लिखा जब 'बजरंग' ने अपनी यारी का ये फसाना,
लफ्ज़ कागज पर उतरते ही बड़े असरदार हो गए।
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