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मैं अपने माज़ी के अय्याम छोड़ आया हूँ

                
                                                         
                            मैं अपने माज़ी के अय्याम छोड़ आया हूँ
                                                                 
                            
पुराने घर के दर ओ बाम छोड़ आया हूँ

जो आ सको तो चले आओ बज़्म-ए-जानां तक
निशान-ए-इश्क़ बह हर गाम छोड़ आया हूँ

तेरी निगाह ने ऐसा सुरूर बख़्शा है
सुराही, मीना, सबू, जाम छोड़ आया हूँ

तमाम उम्र मेरा इंतज़ार तुम करना
तुम्हारे ज़िम्मे यही काम छोड़ आया हूँ

तुम्हारा हुक्म सुना और मारे उजलत में
कहीं चराग़, कहीं शाम छोड़ आया हूँ

तुम्हारे शहर से रुख़्सत तो हो गया हूँ मगर
तुम्हारे नाम का पैग़ाम छोड़ आया हूँ

बिलाल बज़्म-ए-तरब की तलाश में देखो
बहार, चाँद, हसीं शाम छोड़ आया हूँ

हसरतों को मिटा रहा है दिल
घर ये खाली करा रहा है दिल

आज शायद वो आने वाले हैं
राह में दिल बिछा रहा है दिल

उससे पूछा जो प्यार की क़ीमत
दिल बना कर मिटा रहा है दिल

इश्क़-ए-ख़ालिक़ में खो गया ऐसा
सारी दुनिया भुला रहा है दिल

आरज़ूओं चलो चलें बाहर
हमसे दामन छुड़ा रहा है दिल

फिर तेरी याद आ गई शायद
इश्क़ में लड़खड़ा रहा है दिल

ज़िंदगानी की रहगुज़र में, बिलाल
धोखा हर बार खा रहा है दिल


 
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25 मिनट पहले

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