तेरा अक्स है मिलता हु- ब - हु मेरे ख्वाबों की तस्वीर से
राबता तुझसे वो जुड़ा, जो जुड़ता है तक़दीर से।
चांद भी रोशन हो जाए तेरी आंखों में वो नूर है
तू तसव्वुर है मेरा, तू एक सराब है
तभी तो दिल के क़रीब पर नज़रो से दूर है।
तुझे मेरी किस्मत में उस कातिब ए तक़दीर ने लिखा ही कहां?
फिर भी राह ए मोहब्बत के मुसाफ़िर हम बने, जिसके रास्ते अंजान और मंज़िल भी लापता।
बेखबर बेखुदी को ही हमसफर बनाया अब
इश्क़ में बे बसीरत बंदे को क्या मालूम
कब रात ढली और सुबह का सवेरा छाया कब।
ढूंढ़ता हर शक्स में तुझको कि मिल जाए तू यही कही
फिर हंसता खुद की नादानी पे क्योंकि जानता हूं
तू बस मेरे ख्यालों में है मेरी...
पर हक़ीक़त है कि तू मेरी हक़ीक़त नहीं।
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