हैं रंग अनगिनत से
जीवन के आसमाँ में
पर मुझको जो रंग पसंद है
जाने मगर कहां है
ढूँढता फिरूँ उसे मैं
फूलों में तितलियों में
सागर की तलहटी में
हरियाली वादियों में
फिर भी नहीं मिला वो
इतने बड़े जहां में
हैं रंग अनगिनत से...।
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