भारत के हृदय में बसा, एक अनुपम प्रदेश,
प्रकृति जहाँ मुस्काती है, धन्य है मध्य प्रदेश।
नर्मदा की निर्मल धारा, करती तेरा गुणगान,
विंध्य–सतपुड़ा की छाया, बढ़ाती तेरा मान।
हरियाली की चादर ओढ़े, वन-उपवन परिवेश,
भारत के हृदय में बसा, अपना मध्य प्रदेश।
खजुराहो की शिल्प-कला में, इतिहास की पहचान,
साँची के स्तूप सुनाते, संस्कृति का सम्मान।
उज्जैन की पावन धरती, महाकाल का धाम,
ओंकारेश्वर की भक्ति में, गूँजे शिव का नाम।
ग्वालियर का गौरव गाए, संगीतों का संसार,
मांडू की हर एक कहानी, है यहाँ की शान।
भोपाल की झीलें कहतीं, सौंदर्य यहाँ विशेष,
रंग अनेक, रूप अनेक—मेरा मध्य प्रदेश।
भाए मन को लोक-संस्कृति, मिट्टी की मुस्कान,
लोकगीतों की मधुर लहरियाँ, बढ़ाती तेरा मान।
कृषि, कला और कर्मभूमि, मेहनत का संदेश,
शौर्य, संस्कृति, सेवा का संगम—मेरा मध्य प्रदेश।
है ताप्ती जीवनधारा, वन तेरी पहचान,
तेरी माटी में बसता है, भारत का अभिमान।
उत्तर से दक्षिण तक गूँजे, यह स्वर्णिम संदेश
“भारत का हृदय हूँ मैं”,
जय-जय मध्य प्रदेश!
- बृजेश उपाध्याय “लक्ष्य”
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