पीछे पीछे न मुड़ कर देखो,
थोड़ा भरोसा रखो आगे बढ़ कर,
मुड़ कर तुम तकों बेशक हर बार,
रह जाए कोई न तुम्हारा यार।
पीछे पीछे न मुड़ कर देखो,
भविष्य तुम्हारा कर रहा इंतजार,
मुड़ के तुम तकों बेशक हर बार,
इतिहास जुड़ा हो तुम्हारा जहाँ यार।
पीछे पीछे न मुड़ कर देखो,
पैर पकड़ कर जो गड्ढे में खींचे,
मुड़ कर तुम तकों बेशक हर बार,
ध्यान बढ़े जहां से मंजिल पाने को यार।
पीछे पीछे न मुड़ कर देखो,
जहाँ तनिक भी अपमान हो जाए,
मुड़ कर तुम तकों बेशक हर बार,
आंखें बिछाए जहां बुलाए सम्मान।
पीछे पीछे न मुड़ कर देखो,
समय हमेशा आगे बढ़ता जाए,
मुड़ कर तुम तकों बेशक हर बार,
समय सिखाए जीवन की चाल।
पीछे मुड़ कर पाओगे तुम,
अतीत तुम्हारा है गुजरा,
आगे बढ़ कर झांँकोगे तुम,
भविष्य तुम्हारा है अतीत से जुड़ा।
-बुद्ध प्रकाश
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