ईक सुरत उस आनन की
जिसमें घोर उदासी थी
और ईक सुरत उस आनन की
जिसमें रंग तरुणाई थी
ईक ओर जहाँ शोर था शामिल
मौन अंगीठी आँच हाँ मद्धम
अंधियारे के इर्द-गिर्द
चाँद उजियारा ले आई थी
कहने को तो कह ही देते
मन विरक्त प्रश्न था बोझिल
देखा
उष्मा उर्जा थी उसकी
सिंच उदासी तरुण द्वार से
चाँद सी शीतल भाव विहार से
आनन का वैभव ले आई थी
आनन का वैभव ले आई थी...🖋
-दामिनी नारायण सिंह
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