दम बात में है तो धीरे से कह देने का कायदा
चढ़कर चोटियों पर चिल्लाने से क्या फायदा.
अब शहर शहर और गांव भी गांव नहीं रह गये
हर वक्त इस फर्क को चिल्लाने से क्या फायदा.
कपड़े जिनको पहनना है अगर ना पहनेंगे वो
अपनी चर्चा बहस में उन्हें रखने से क्या फायदा.
लोग आवारा बन गालियां जब सभी पढ़ रहे
ये संसद भवन स्कूल घर बनाने से क्या फायदा.
ओढ़ कर चोला शैतान का चल रहे हैं हम सभी
पाठ इंसानियत का पढ़ाने से अब क्या फायदा.
-दिनेश चौहान
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X