आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

दिल का रिश्ता

                
                                                         
                            तुम्हारे साथ मेरा दिल का रिश्ता किस्मत से बन गया यार,
                                                                 
                            
वरना मेरी मुलाकात तो हजारों हसीनाओं से होती है,
ना मैं ने तुम्हें ढ़ूढ़ा,ना तुम ने मेरी कहीं तलाश की,
बस किस्मत, खुदा ने हम दोनों का नाम एक दूसरे से जोड़ दिया,
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
56 मिनट पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर