मैं जो तेरा हो गया
जन्नत बसेरा हो गया
रात तारों सी सजी
रौशन सवेरा हो गया
जुस्तजू जिसकी थी दिल में
वो चाँद मेरा हो गया
तुम से मिलके जाने-जाँ
गुलशन में डेरा हो गया
दुनियावालों कुछ न पूछो
कब मैं जागा, सो गया
महफिलों में चर्चे मेरे
कैसा ये रुतबा हो गया
मस्ती छाई चाल में
जाने क्या मेरा हो गया
दर-दर फिरूँ, सजदा करूँ
ये दिल फकीरा हो गया
- डॉ. रश्मि झा
rashmijha1909@gmail.com
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