आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

चर्चा बड़ा जग में तेरा

                
                                                         
                            चर्चा बड़ा जग में तेरा
                                                                 
                            
रहता कहाँ, कुछ तो बता

तेरी चाहतों का ये सिलसिला
जो चला तो बस चलता गया
न कभी रुका, न कभी थमा
क्या राज ये, कुछ तो बता

चर्चा बड़ा जग में तेरा
रहता कहाँ, कुछ तो बता

मैं तो चल पड़ा तेरी याद में
बंदा बना, सजदा किया
तू छुपा रहा, मेरी रूह में
कभी रूबरु मेरे भी आ

चर्चा बड़ा जग में तेरा
रहता कहाँ, कुछ तो बता

जो तू बन गया मेरा मयकदा
जी भर पिया, जी भर जिया
सरे-राह झूमे तेरे लिए
वाह-वाह किया, वाह-वाह किया

चर्चा बड़ा जग में तेरा
रहता कहाँ, कुछ तो बता

तेरे रूह में है वो ताज़गी
जैसे गंगा मैं नहा गया
ज़र्रे में भर दी रौशनी
तेरी रहमतों का है शुक्रिया

चर्चा बड़ा जग में तेरा
रहता कहाँ, कुछ तो बता

तेरा सिफ़त, तेरी सादगी
मेरी बंदगी, मेरी बानगी
तेरे लिए ये दीवानगी
दोनों जहान से मैं गया

चर्चा बड़ा जग में तेरा
रहता कहाँ, कुछ तो बता

- डॉ. रश्मि झा
rashmijha1909@gmail.com

- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर