चर्चा बड़ा जग में तेरा
रहता कहाँ, कुछ तो बता
तेरी चाहतों का ये सिलसिला
जो चला तो बस चलता गया
न कभी रुका, न कभी थमा
क्या राज ये, कुछ तो बता
चर्चा बड़ा जग में तेरा
रहता कहाँ, कुछ तो बता
मैं तो चल पड़ा तेरी याद में
बंदा बना, सजदा किया
तू छुपा रहा, मेरी रूह में
कभी रूबरु मेरे भी आ
चर्चा बड़ा जग में तेरा
रहता कहाँ, कुछ तो बता
जो तू बन गया मेरा मयकदा
जी भर पिया, जी भर जिया
सरे-राह झूमे तेरे लिए
वाह-वाह किया, वाह-वाह किया
चर्चा बड़ा जग में तेरा
रहता कहाँ, कुछ तो बता
तेरे रूह में है वो ताज़गी
जैसे गंगा मैं नहा गया
ज़र्रे में भर दी रौशनी
तेरी रहमतों का है शुक्रिया
चर्चा बड़ा जग में तेरा
रहता कहाँ, कुछ तो बता
तेरा सिफ़त, तेरी सादगी
मेरी बंदगी, मेरी बानगी
तेरे लिए ये दीवानगी
दोनों जहान से मैं गया
चर्चा बड़ा जग में तेरा
रहता कहाँ, कुछ तो बता
- डॉ. रश्मि झा
rashmijha1909@gmail.com
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