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सिलसिले कुछ प्यार में ऐसे रहे

                
                                                         
                            सिलसिले कुछ प्यार में ऐसे रहे
                                                                 
                            
गुल, बहार, चाँद राहों में रहे

शोख़ नज़रें जागती थीं रात भर
कहकशाँ दामन में सिमटे ही रहे

धड़कनों में गीत मीठे से नये
चाहतों के साज़ पे बजते रहे

हसरतों ने छू लिया था आस्माँ
ख़्वाब कितने कदमों से लिपटे रहे

रात की बरसात दिल का हाल बन
ख़त में रिमझिम सा बरसते ही रहे

+ डॉ. रश्मि झा


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3 वर्ष पहले

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