जन्नत का हरेक रास्ता, तेरा ही पता है
मुझ में छुपा के खुद को, तू लापता है
- डॉ. रश्मि झा
हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X