यह है जंग का मैदान,
यह पल का खेल नहीं।
पीछे सुखों की छाँव,
आगे दुखों का गहरा जल थमा नहीं।
कभी आँखें बंद कर खुद को देख,
तुझे दिखेगा एक ब्रह्मांड अपने अंदर।
दुनिया की भीड़ छोड़कर भीतर उतर,
तब मिलता है एक साम्राज्य मन के अंदर।
कौन कहता है कि तू अकेला है?
तेरी परछाई भी तेरे पीछे खड़ी है।
रात के समय जब सब थम जाता है,
तेरी साँस भी तुझे साथ देती बहती है।
तेरे ही हाथ हैं, तेरा ही मन है,
यही तेरा सच्चा और अपना धन है।
तेरे सिवा कोई और नहीं यहाँ,
तू ही अपना दीप, तू ही अपना आसमाँ।
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