आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

तू अकेला नहीं है..

                
                                                         
                            यह है जंग का मैदान,
                                                                 
                            
यह पल का खेल नहीं।
पीछे सुखों की छाँव,
आगे दुखों का गहरा जल थमा नहीं।

कभी आँखें बंद कर खुद को देख,
तुझे दिखेगा एक ब्रह्मांड अपने अंदर।
दुनिया की भीड़ छोड़कर भीतर उतर,
तब मिलता है एक साम्राज्य मन के अंदर।

कौन कहता है कि तू अकेला है?
तेरी परछाई भी तेरे पीछे खड़ी है।
रात के समय जब सब थम जाता है,
तेरी साँस भी तुझे साथ देती बहती है।

तेरे ही हाथ हैं, तेरा ही मन है,
यही तेरा सच्चा और अपना धन है।
तेरे सिवा कोई और नहीं यहाँ,
तू ही अपना दीप, तू ही अपना आसमाँ।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 दिन पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर