मिलता है संतोष सुख, होता है विश्वास।
ऐसी कविता कामिनी, सतत् करें अभ्यास।।
सतत् करें अभ्यास, काव्य बन जाए न्यारा।
बनें काव्य मर्मज्ञ, काव्य रस बहती धारा।।
सुधिजन देते मान, सुयश जीवन में खिलता।
कवि की सृष्टिअपार,नहीं दुख इसमें मिलता।।
- एन के सेठी
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