सदा ऐश दौराँ दिखाता नहीं
गया वक़्त फिर हाथ आता नहीं
- मीर हसन
सुब्ह होती है शाम होती है
उम्र यूँही तमाम होती है
- मुंशी अमीरुल्लाह तस्लीम
वक़्त की गर्दिशों का ग़म न करो
हौसले मुश्किलों में पलते हैं
- महफूजुर्रहमान आदिल
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