वसुधा के रज का सोन्हापन
जिसमें सब व्योम समाया है,
धरणी बनकर जिसने सब का
जीवन ही धन्य बनाया है।।
खग पशु मानव जीवंत यहां
तेरे प्रतिफल की छाया है,
अंको में खेले पले बढ़े
ये सब तेरी ही माया है।।
प्रसून लताओं सा जीवन हो
लालिमा सदैव चरम पर हो,
अंतर्मन में यह भान रहे
जीवन हो मरण यहीं पर हो।।
साकार सुमंगल हर पल हो
अंबा का हर पल ध्यान रहे,
निशि_वासर इसका ज्ञान रहे
मिट्टी खुशबू की आन रहे।।
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