प्यार ऐसा हो जिसके दिए दर्द में भी प्यार का एहसास हो,
उसकी आँखों में झलकता हर अनकहा जज़्बात हो।
खामोशियाँ भी उसकी जैसे कोई मीठी बात हों,
बिन कहे भी मुकम्मल, हर एक मुलाकात हो।
दूरियाँ भले हों दरमियाँ, पर रूह उसके पास हो,
ज़िंदगी की हर दुआ में, बस उसी का साथ हो।
प्यार ऐसा हो जहाँ खोकर भी खुद को पा सकें,
जिसका होना ही बस, जीने की सबसे बड़ी आस लगे
मुकम्मल हो हमारी दासता कुछ ऐसी ,
पहचान से पहले मिले वास्ता कुछ ऐसी ,
शिकवे हों दिल में, न कोई मलाल हो,
बस उसकी धड़कनों में मेरा सवाल हो।
वो रास्तों की थकन में भी एक छाँव सा लगे,
अजनबी होकर भी जाना-पहचाना ठाँव सा लगे।
उसे पा लिया तो जैसे कायनात मिल गई,
बिछड़ कर भी रूह को उसकी पनाह मिल गई।
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