NIPER के कैंपस से,
कैंपस के बागों से
बागों में फूलों से
फूलों की
खुशबू से मोहब्बत है
दिन के पहरों से
कीटों में भँवरों
तितलियों से,
जुगनू से मोहब्बत है
पीले सूरजमुखी फूलों से
सफेद चंपा से,
चमेली से मोहब्बत है
शहरों में लखनऊ से
लखनऊ में NIPER
रायबरेली से मोहब्बत है
लैब में केमिकल से,
काँच के बर्तन से
प्लास्टिक के डिब्बों से,
कागज़ के गत्तों
से मोहब्बत है
मशीनों से, टेक्नीशियन से
सीनियर्स से,
दोस्तों से मोहब्बत है
अपने पागलपन से,
जवानी में छिपे बचपन से
शायरी से, कविताओं से
किस्सों से, पहेली से मोहब्बत है
शहरों में लखनऊ से
लखनऊ में NIPER
रायबरेली से मोहब्बत है
पेट्रोल पंप के
पास वाले ढाबा से
एक अनजान बाबा से
पैकेट वाली चीज़ों से
मसाले वाले छाछ से
लस्सी और दूध की
थैली से मोहब्बत है
शहरों में लखनऊ से
लखनऊ में NIPER
रायबरेली से मोहब्बत है।।
- ज्ञानसागर चौधरी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X