आज वो मेरे साथ है, मेरे पास है,
फिर भी दिल को बीते हुए कल की तलाश है।
जिसके इंतज़ार में उम्र-सी गुज़र गई,
आज वही सामने है… और आँखों में उदास-सी प्यास है।
कितनी रातें थीं,
जब उसका नाम लेकर चुप हो गया था मैं,
कितनी सुबहें थीं,
जब उसकी याद से ही रो गया था मैं।
वो शायद जान भी न सकी,
उसकी दूरी ने मुझे किस तरह तोड़ा था—
मैं बाहर से ज़िंदा रहा,
पर भीतर कुछ रोज़-रोज़ थोड़ा था।
आज वो पास बैठी है,
तो दिल कोई शिकायत नहीं करता,
बस चुपचाप उसकी ओर देखता है…
और जाने क्यों,
आँखों से थोड़ा-सा पानी उतर आता है।
शायद ये आँसू खुशी के नहीं,
उन दिनों की करुण कहानी हैं,
जो उसके बिना गुज़ारी थीं—
वो रातें, वो तन्हाइयाँ,
वो अधूरी बातें,
वो ख़ामोशियाँ पुरानी हैं।
आज उसे छूकर लगता है,
जैसे किसी ने मेरी सारी थकान सहला दी हो,
जैसे बरसों से रोता हुआ दिल
किसी अपने की गोद में आकर
आख़िरकार सो गया हो।
अब उससे कुछ माँगना नहीं है,
न कोई वादा, न कोई सफ़ाई चाहिए,
बस जब तक वो मेरे पास है,
उसका हाथ मेरे हाथ में रहने दो।
क्योंकि मैंने उसके बिना
मोहब्बत का दर्द बहुत करीब से देखा है…
और अब जब वो लौटकर मेरे पास है,
तो डरता हूँ—
कहीं ये ख़ुशी भी
फिर किसी विरह की रात न बन जाए।
आज वो मेरे साथ है, मेरे पास है,
इसलिए आज दिल को रो लेने दो…
बहुत सहा है इसने उसके बिना,
आज उसे मोहब्बत में
थोड़ा और जी लेने दो।
हेम___
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