कही दूर
किसी समंदर
के किसी सुराख़ में
जाओ जाकर
दफ़न कर दो
अपनी नफ़रत
आज हर इन्सान
की वाजिब
है ज़रूरत
इस संसार
में फैला दो
मोहब्बत
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