हम आज बर्बाद नहीं पर हम आज आबाद भी नहीं।
बर्बादी हमारी हो ऐसा हमारा होगा कोई कार्य नहीं।।
पर हम आबाद भी हो सकें ऐसा कोई आधार नहीं।
शिद्दत से,जतन से आगे बढ़ने का हमारा प्रयास
जिसमें आज भी कोई आग नहीं।।
ज्योत जलाए रखने का इंदिरा का रहेगा हर आगाज़ ।
तेरे बार बार मुझे यूँ बेखौफ गिराने का भी जबाव नहीं।।
दरख़्त के साए में हैं जो आज भी कुछ ऐसे मदहोश।
जिन्हें आगामी ख़तरों का ज़रा भी हुआ एहसास नहीं।।
हम न होंगे कभी बर्बाद, पर आबाद तो होंगे जरूर।
नशा है जो मेरी आबादी का मुझ पर, सर से मेरे आज भी उतरा ही नहीं।।
हम आज बर्बाद नहीं पर हम आज भी आबाद नहीं।
बर्बादी हमारी हो ऐसा हमारा होगा कोई कार्य नहीं।।
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