अंतर्दशा
छिन गया तो रो पड़े और,
छीन पाये तो धमाल।
सबसे कुछ पाने का लालच,
और खोने का मलाल,
एक ज़रा-सी बात पर
कर दिया कैसा बवाल।
चीखते ही जा रहे हो
ग़ुस्से में हो करके लाल।
जो तुम्हें समझा सके,
है यहाँ किसकी मज़ाल।
हर साँस में तुमने उठाए,
सब पर कितने ही सवाल।
अंदर से कितने दुखी हो,
क्या बना रखा है हाल।
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