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देशभक्ति?

                
                                                         
                            याद करतें है वतन को लोग पन्द्रह अगस्त पर,
                                                                 
                            
क्या माँ याद करती है तुम्हे केवल तुम्हारे जन्मदिन पर,
क्या पत्नि याद करती है तुम्हे केवल शादी की सालगिरह पर,

सोचो हम देश के लिए क्या करते है,
क्या हम उन्हें याद करतें है जो हमारे लिए लड़तें है,
जिसके लिए वे लड़ते है,
वे याद करते है उन्हें केवल पन्द्रह अगस्त पर,

हस हर स्थिति में डटे रहते है सिमा पर,
झेलते है हर मुसिबत अभिमान से,
रहते है तैयार होने को न्योछावर वतन पे,
और हम याद करते है उन्हें पन्द्रह अगस्त पे,

इतिहास बताता है, बीस-बीस को एक ने मारा है,
हर तकलीफ सही है हर गम को मारा है,
वे उस नदी में है, जिसका ना कोई किनारा है।
खून पसीना वो बहाए ताकि हम गर्व से कह सकें,

हिन्दुस्तान हमारा है और हमे याद करते है उन्हें पन्द्रह अगस्त पर,

न वे गोला बारूद से डरतें है,
न माँ के आँसुओ की परवाह करते है,
बस सिमा की निगरानी किया करतें हैं,
और हम याद करते हैं उन्हें पंन्द्रह अगस्त थे,

होसला हो तुम उन विरो का,
सिमा पर डटे उन दिलेरो का,
सुनकर वे गद्गद् हो जाएगें
जब हम दिल से उनके लिए शीश झुकाएगें ।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
1 सप्ताह पहले

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