धूप ने पूछा था मेरा पता
मैंने कहा—
जहाँ उदासी जूते उतारती है,
वहीं मेरा घर है।
नदी ने लिखा था खत
पत्तों की पीठ पर,
मैं पढ़ न सका
क्योंकि आँखों में शहर भरा था।
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