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आ तुझे बताऊं गर फुरसत है

                
                                                         
                            आ तुझे बताऊं गर फुरसत है,
                                                                 
                            
कब मुझको तेरी जरूरत है,,

खुद ही खुद से जाऊ ठगी
परछाई भी ना लगे सगी
जब रात रात भर रहूं जगी,
तब मुझको तेरी जरूरत है

गुस्से का ज्वाला फटने लगे,
जब अंतर्मन भी हटने लगे,
जब मन खुद से ही कटने लगे
तब मुझको तेरी जरूरत है,

धूमिल यादों की छवियां हो
जब जब मुरझाई कलिया हो
जब मन की सूनी गलियां हो
तब मुझको तेरी जरूरत है

कुछ अजीब सा होने लगे
जब दोनों अँखिया रोने लगे
अश्कों से काजल खोने लगे
तब मुझको तेरी जरूरत है,

जब सारी झूठी आश लगे
और ना कोई भी पास लगे
जब जीना भी ना खास लगे
तब मुझको तेरी जरूरत है,

आ तुझे बताऊं गर फुरसत है,
कब मुझको तेरी जरूरत है,,
- गुडडू बाबरा 
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एक घंटा पहले

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