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Social Media Poetry: धीमी हवा अचानक बढ़ती बढ़कर और प्रबल होती है

वायरल काव्य
                
                                                         
                            यदि  मन  में  कोई  भ्रम  है  तो 
                                                                 
                            
हर  भ्रम  छोड़ो  सुनो समय को 
चीख चीख कर समय कह रहा
शान्ति नहीं यह सन्नाटा है !

सन्नाटों   के   बाद  समुद्रों  में  प्रायः  हलचल  होती  है 
धीमी हवा अचानक बढ़ती बढ़कर और प्रबल होती है 

इसी    हवा   से   बड़े जहाजों - 
तक  के  नाम निशान न मिलते
तुम सागर की कपट कथा को 
कहते रहो ज्वार भाटा है !

भ्रमित समय की भाषाएं भी प्रायः भ्रम का पोषण करतीं
भ्रम से बाहर कभी न आने का हठ करतीं या प्रण करतीं

खरगोशों की कुटिल कला से 
शेर    कुएं   में   गिर  जाते हैं 
भ्रम को भ्रम समझो, मत सोचो
कौन बड़ा है या नाटा है !

सबसे  अधिक  रुदन  करने  वाले ही मिले कई हत्यारे 
आवश्यक  है  जाँचें  जायें  किसके आँसू कितने खारे 

कई  विघ्न   संतोषी  भी तो 
इसी  शोर  में  छिपे  हुये  हैं
देखो  अगर  देख सकते हो 
किसका लाभ कहाँ घाटा है ? 

साभार: ज्ञान प्रकाश आकुल की फेसबुक वाल से 

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17 घंटे पहले

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