सुनो
कभी नदी प्रवाह में खो जाऊं
ढूंढना मत व्यथित भी न होना
तुम पाषाण हृदय हो जाना
अंतिम अविरल प्रवाह में
पाषाण अवलंबन बन जाना।
सुनो
तुम और मैं युग साथी हैं
दीपक बाती हैं
हमारा प्रेम अविनाशी है
चिर अनंत संगी हैं
मेरे खो जाने से
भयभीत मत होना।
सुनो
हम साथ चलते रहे
आगे भी साथ चलेंगे
प्रभात की रश्मियों में
चन्द्र की हिम अर्चियों में
हमारा प्रेम अटूट है
समय का अविरल प्रवाह है।
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