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देशभक्ति ग़ज़ल

                
                                                         
                            प्यार है मुझको वतन से |
                                                                 
                            
सींचता इसको नमन से |

भेदभाव ना रखूं मन,
प्यार है सबके चमन से |

मन को भाते फूल खिलते,
प्यार है झरते अमन से |

मरना हो गर सच वतन पर,
प्यार है तन पे कफ़न से |

वीर रक्षा हित चले जो,
प्यार है उस नित हवन से |

राम नानक यीशु 'आमद',
प्यार है सच में हसन से |
- के. के. सिंह 'आमद' 
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2 दिन पहले

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