प्यार है मुझको वतन से |
सींचता इसको नमन से |
भेदभाव ना रखूं मन,
प्यार है सबके चमन से |
मन को भाते फूल खिलते,
प्यार है झरते अमन से |
मरना हो गर सच वतन पर,
प्यार है तन पे कफ़न से |
वीर रक्षा हित चले जो,
प्यार है उस नित हवन से |
राम नानक यीशु 'आमद',
प्यार है सच में हसन से |
- के. के. सिंह 'आमद'
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