आँखों में समंदर,
और होठों पर मुस्कान है,
ज़िन्दगी की हर मुश्किल का,
सब्र ही तो समाधान है।
थक कर बैठना मंज़ूर नहीं,
हार कर रोना काम नहीं,
तूफ़ानों में जो कश्ती पार लगा दे,
उसी हुनर का नाम सब्र है।
लोग ढूंढते हैं सुकून महफ़िलों में,
पर वो तो छुपा अपने ही अंदर है,
जिसने सीख लिया चुप रहकर सहना,
वही तो "चिंका" सिकंदर है।
वक़्त बदलेगा, ये यक़ीन रख,
हर अंधेरे के बाद सवेरा होता है,
जो सब्र की उंगली थामे रखे,
जीत का सेहरा उसी के सर होता है।
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