हम से पूछते हो तुम क्या ख़ुशी के बारे में
अजनबी बताए क्या अजनबी के बारे में
मस'अला है ऐसा जो सुलझा है न सुलझेगा
लोगों का ये कहना है ज़िंदगी के बारे में
चाँद छू चुका लेकिन कम है आगही अब भी
आदमी को दुनिया के आदमी के बारे में
मासिवाए बर्बादी कुछ नहीं ये देती है
तजरिबा हमारा है आशिक़ी के बारे में
चल के देख तो ले क्यों तीरगी से डरता है
रात ख़ुद बता देगी रौशनी के बारे में
उन को याद करने का ये तो इक बहाना है
सोचते नहीं वरना शायरी के बारे में
रंग-ओ-बू की दुनिया में सच यही है ऐ सज्जाद
पूछता नहीं कोई सादगी के बारे में
-इब्राहीम सज्जाद तैमी
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