है अद्भुत ये आलिंगन!
भूख और प्यास से तड़पता शिशु,
माँ के आलिंगन को पा हो जाता तृप्त,
मानो अमृत-पान कर ली हो,
जन्म के साथ ही मोक्ष मिल गया जैसे,
आभास ऐसा कि हो गया मुक्त,
जीवन और मृत्यु के चक्र से!
ये अद्भुत आलिंगन!
पुरुष और प्रकृति का मिलन,
आलिंगन से होता पूर्ण,
असीम प्रेम और समर्पण का,
अनूठा संगम,
शुरुआत भी होता इससे,
और अंत भी करता सुखद!
ये अद्भुत आलिंगन!
शहीद की शहादत का प्रतीक,
जब सैनिक करता मृत्यु का आलिंगन,
करता ख़ुद सम्पूर्ण समर्पण,
दिखाते युद्ध कौशल,
और करते प्रदर्शन पूर्ण देशभक्ति का!
ये अद्भुत आलिंगन!
एक जादुई शक्ति,
सबल करता दुखी को,
अभिव्यक्ति ये करुणा और ममता का,
प्रेम की अनुभूति का माध्यम,
ढाँढस देता, उत्साह और ऊर्जा का करता संचार,
हरता दुःख पल भर में,
जब हम करते आलिंगन!
-मेदनी कांत झा
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X