वातावरण शांत था
चित्रगुप्त पन्ने पे पन्ना पलट रहे थे
यमराज अपनी ठुड्डी पर हाथ धरे
कुछ न कुछ बोल रहे थे!
मृत्यु और न्याय के देवता
और ब्रह्मा के मानस पुत्र दूसरे
जीवों के पाप पुण्य का
लेखा जोखा करने बैठे!
मगर दोनों परेशान थे
हैरान थे, देख दुनिया का हाल
हर जीव के हाथ में चमक रहा
एक छोटा सा मोबाइल जाल!
हर पाप पुण्य के आगे आता
लिखा हुआ ये “फॉरवर्डेड”शब्द
मोबाइल के द्वारा ही हो जाता
हर काम का आरम्भ और अंत!
चित्रगुप्त ने फरमाया हे प्रभु
ये किसका नया अवतार है
पाप तो कम हुए नहीं धरा पर,
हर पाप का अब ऑनलाइन प्रचार है!
कैसे करूँ न्याय इस नीली रोशनी
के दरम्यान होते हैं जो अत्याचार
कमरा चाहे भरा हुआ है यहाँ
लेकिन अदृश्य हो कर पनपते भ्रष्टाचार!
मानसिक रूप से तो सभी बीमार
आयताकार स्क्रीन में फँसे मझधार
परछाई बन विचरण करते फ़ोन पे
लेकिन किसी का न होता बेड़ा पार !
झूठ यहाँ फ़िल्टर पहनता है
सच लाइक ढूँढता फिरता
पुण्य बिना कैमरे की आवाज़ के
अब किसी काम का नहीं दिखता!
यमराज बोले स्वर्ग नरक में भी
क्या अब नेटवर्क लगवाना होगा?
वरना कोई मोबाइल प्रेमी यहाँ
एक पल भी टिक न पाएगा!
नहीं सरकार ! बोले चित्रगुप्त
इसी ने तो बिगड़ा है इन लोगों को
इस में घुस कर भूल गया है ये
अपनी सामाजिक कर्तव्यों को
बताना होगा सीखना होगा
इसे फिर से याद दिलाना होगा
इस नीली रोशनी से बाहर की दुनिया
कैसी दिखती, समझाना होगा
नहीं तो वो दिन दूर नहीं
जब बिखर जाएगा ब्रह्मांड सारा
और ये लोग चैट जीपीटी से ही पूछते रहेंगे
ये क्यों हुआ हाल हमारा !
-मीनू लोढ़ा
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