" फर्क है गांव और शहर में
शहर में शौर गाड़ियों की हॉर्न की
तो गांव गुजता पंछियों के सुरोसे।।
फर्क है गांव और शहर में।।
शहर रोजगार कर जरूरते पुरी करने का जरिया , तो गांव अनाज उगा पेट भरने का जरिया
फर्क है गांव और शहर में ।।
शहर में बातो का सिलसिला हाय, हैलों और हाथे मिलाने से शुरु होती,
तो गांव में बुजुर्गो के पाव छु, बड़ो को पणनाम कर, और हम उम्र को नमस्कार करने का चलन
फर्क है गांव और शहर में।।
गांव के संस्कार कुप्रथा हो चुके है शहर में
तो नियम शहर के चोचले लगते है गांव में
फर्क है गांव और शहर में।।
शहर में कुत्ते पाले तो उसे कुत्ता नही बोल सकते, गांव में गाय पाले तो गवार कहलाते हैं, फर्क तो है गांव और शहर में।।
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