आसमां में उड़ते परिंदे चिलमिलाती
धूप में एक मक़ाम देखेंगे।
हम एक दिन उनसे खाफ होकर
उनके मानने का अंदाज़ देखेंगे!
मोहब्बत तो कर लिया अब
बेरुखी का भी इंतकाम देखेंगे।
- मोहन त्रिपाठी
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