वो लम्हे थे मुस्कुराने के,
बारिश में भीग जाने के,
हथेलियों पर कुछ सपने लिखने के,
और आँखों में एक दुनिया बसाने के।
रातें बहुत सुहानी थीं,
चाँद भी जैसे हमारा हमराज़ था,
सितारे भी चुपके से मुस्कुरा देते थे,
और हर हवा का झोंका तुम्हारा एहसास था।
दिल में कहने को बहुत-सी बातें थीं,
कुछ शिकायतें, कुछ मोहब्बत की फरियादें थीं,
पर होंठों तक आते-आते हर लफ़्ज़ ठहर गया,
जैसे किसी ने मेरे एहसासों का रास्ता ही बदल दिया।
वो भीगी-भीगी रातें अब भी याद आती हैं,
जब हर बूँद तुम्हारा नाम लेकर गिरती थी,
और मैं आसमान से पूछता था—
क्या तुम भी कहीं इसी बारिश में भीग रही हो?
कुछ लफ़्ज़ अनकहे रह गए,
कुछ ख़्वाब अधूरे रह गए,
कुछ ख़त कभी लिखे ही नहीं गए,
और कुछ आँसू बिना आवाज़ के बह गए।
मैंने चाहा था कि तुम मेरे हर मौसम में रहो,
मेरी हर ख़ुशी और हर दर्द में रहो,
पर किस्मत को शायद यह मंज़ूर न था,
तुम मेरे पास होकर भी मेरे न हो सके।
बात अनकही ही रह गई,
दिल की कशिश दिल में ही दबी रह गई,
एक अरसा बीत गया तुम्हें याद करते-करते,
पर तुम्हारी कमी कभी कम न हुई।
आज भी जब कोई बारिश की बूँद चेहरे को छूती है,
तो लगता है जैसे तुम्हारा स्पर्श लौट आया हो,
जब कोई चाँद को देखकर मुस्कुरा देता है,
तो लगता है जैसे तुमने फिर मुझे याद किया हो।
मैंने बहुत कोशिश की तुम्हें भूल जाने की,
तुम्हारे बिना जीने की,
पर कुछ लोग ज़िंदगी से चले जाते हैं,
दिल से कभी नहीं जाते।
अब भी मेरी तन्हाइयाँ तुम्हारा नाम लेती हैं,
अब भी मेरी रातें तुम्हारा इंतज़ार करती हैं,
अब भी मेरी आँखें उस रास्ते को देखती हैं,
जहाँ से तुम कभी आए ही नहीं।
वो लम्हे हसीन रहे ही नहीं,
वो बारिशें रंगीन रही ही नहीं,
वो चाँदनी भी फीकी पड़ गई,
वो धड़कन भी अधूरी रह गई।
क्योंकि हर मुस्कान में तुम्हारी कमी थी,
हर खुशी में एक उदासी छिपी थी,
हर दुआ में सिर्फ़ तुम्हारा नाम था,
और हर साँस को बस तुम्हारा इंतज़ार था।
मोहब्बत अधूरी नहीं थी,
बस मुकम्मल होने के लिए तुम नहीं थे।
ख़्वाब टूटे नहीं थे,
बस उन्हें सच करने के लिए तुम नहीं थे।
वो लम्हे सिर्फ़ लम्हे बनकर रह गए,
वो ख़्वाब सिर्फ़ ख़्वाब बनकर रह गए,
वो चाहत सिर्फ़ एक याद बनकर रह गई—
क्योंकि तुम थे ही नहीं…
हाँ, क्योंकि तुम थे ही नहीं…
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