रिश्ते नाते एक दूसरे मन के संग हैं।
एहसास और एतबार के रंग होते हैं।
रिश्ते एक दूसरे साथ बंधें रहते हैं।
हर रिश्ते की राह एक डोर होती है।
मन और विचारों की सोच रहती हैं।
शब्दों के साथ रिश्ते नाते बनते हैं।
रिश्ते ही तो सब नाजुक डोर होती हैं।
हम सब मिलकर आओ सोचते हैं।
हां रिश्ते तो नाज़ुक डोर से बंधे होते हैं।
चाहत और मोहब्बत में रिश्ते रहते हैं।
आजकल आधुनिक विचारों में हम हैं।
रिश्ते ही तो हम सबके अपने कहां हैं।
हम नाजुक डोर रिश्तों की कहते हैं।
एक दूसरे को हम सब समझते हैंं।
रिश्ते की नाज़ुक डोर सदा जोड़ते हैं।
-नीरज कुमार
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