शुभ संध्या हम कहते हैं।
सब मिल कर कहते हैं।
एक-दूसरे से करते हैं।
शुभ संध्या मित्रों कहते हैं।
आशा और विश्वास रखते हैं।
नीरज शुभ संध्या लिखते हैं।
एक सच यह शुभ संध्या हैं।
आओ हम सब कहते हैं।
-नीरज कुमार अग्रवाल
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