आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

मुझे चलने दो

                
                                                         
                            मुझे चलने दो, मत रोको
                                                                 
                            
जब तक मेरी सांस चल रही है
जब तक मेरी आस जग रही है
मुझे चलने दो, मत रोको
जर- जर काया में हृदय का स्पंदन बाकी है
अविरल गति से डगमगाते कदमों से
मुझे चलने दो, मत रोको
मन मजबूत है, संकल्प अडिग है
तो मुझे चलने से कौन रोक सकता है
समय कदापि नहीं, दुनिया कदापि नहीं
मौसम कदापि नहीं, भूकंप कदापि नहीं
मै तो परमात्मा से संलग्न आत्मा हूं
ईश्वर के व्दारा भेजा गया शांतिदूत हूं
विश्व के हर कोनों पर शांति चाहता हूं
मेरे प्राण त्यागते तक मत रोको
मुझे चलने दो, मत रोको
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
19 मिनट पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर