हक मत जता बंदे !
तुझे यहाँ सदा नहीं रहना है।
कभी तो तू होगा जर्जर,
सौंप दे जिसका जितना हिस्सा है।
ना कोई कुछ साथ लाया,
ना कुछ साथ ले जाएगा,
कहने सुनने से कुछ नहीं होगा,
सब औलाद के लिए ही करते हैं,
यह तो हर घर घर का किस्सा है।
-चंद्र दत्त शर्मा
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