मुड़कर देख लूं तुझे!
मुझे सुकून आ जाए।
यह यकीन करूं कैसे?
कि तू फिर मिल जाए।
कुछ तो हो अजब ऐसा,
मेरे मन मंदिर में बस जाए।
मिलकर बसा लें दुनिया,
बस तू मेरी बन जाए।
-चंद्र दत्त शर्मा
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