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मसर्रत ज़िंदगी में है

                
                                                         
                            तेरे होने से ही शामिल मसर्रत ज़िंदगी में है
                                                                 
                            
मोहब्बत बन गई अब तो इबादत ज़िंदगी में है

कभी पलकों पे आँसू भी नहीं आने दिए तुमने
ख़ुदा की इस कदर हम पर इनायत ज़िंदगी में है

मुझे तेरी मोहब्बत का सहारा मिल गया हमदम
मेरी हर साँस तेरी ही अमानत, ज़िंदगी में है

हजारों ख्वाहिशें होंगी नहीं बस तेरी ही हसरत
ज़रूरी ये मोहब्बत भी निहायत ज़िंदगी में है

वो तुम वो शाम क्या भूलेगी 'पारुल' को बताओ तुम
ज़मीं पर ही मिली जब तुमसे जन्नत ज़िंदगी में है
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17 घंटे पहले

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