यदि आपके जीवन में कुछ लोग या नजदीक
के रिश्तेदार हैं या अपने हैं या कोई भी ऐसा
जो आपके जीवन से जुड़ा है।
और उन्होंने आपके अच्छे बुरे वक्त में
ना आपके साथ खड़े थे।
केवल पीठ पीछे नजर रखते थे। आपके
जीवन से कोई लेना-देना नहीं।
आपकी तकलीफ से कोई मतलब नहीं।
हां आपकी जानकारी गतिविधियों का
पता उनको हर पल रहा है।
बाहरी दिखावा उन्होंने हमेशा किया है
किसी पार्टी फंक्शन में झूठी आत्मीयता
दिखाना। ताकी वह दुनिया के सामने ग़लत
साबित ना हो सकें।
और बहुत वर्षों से आपके घर के पास रहते
हुए भी वह आपसे कभी मिले ना ही संपर्क
करने की कोशिश की चाहे आप कितने ही
मुश्किल में रहे।
अब अचानक से वही लोग आपके दरवाजे
की घंटी बजाएंगे और आपसे बड़ा मीठा
व्यवहार करेंगे तो क्या आप उन पर भरोसा
करेंगे।
जब रिश्ते इस कदर दूर हो जाएं जब पास रहकर
भी कोई आवाज ना दे पाएं।
यह सोचिए की इतने वर्षों से आप कहां
गायब थे और जब आप आएं हैं तो सामने
वाले के मन में आपके प्रति वो सम्मान या
आदर रहेगा? आप आए जरूर हैं पर
साथ में शक असुरक्षा जासूसी और बहुत
सारे प्रश्न मन मस्तिष्क में मंडराते हैं।
चाहे आपकी मंशा सही भी हो पर आप पर
भरोसा नहीं कर सकते।
और यदि साहस है दोबारा रिश्ते पहले जैसे
करने की तो खुलकर अपनी बात रखिए।
फिर आप आकर भी अपनी भावनाएं व्यक्त
ना कर पाएं जिससे सामने वाला असमंजस
में पड़ जाएं की आखिर चाहते क्या हैं।
कृपया खुले विचारों के बनिए अपनी बात
सामने वाले तक पहुंचाइए बेझिझक।
मन और नीयत साफ रखिए ना ही किसी
के घर के भेदी बनिए ना तमाशबीन बनिए।
मैंने यह बात हमेशा महसूस की है अपने
इर्द-गिर्द लोगों को देखकर।
और उससे भी अजीब बात यह लगती है
की एसे रिश्ते दार लाभ और फायदे की
बात करने आते हैं अब इसमें किसका
फायदा है हमारा या उनका।
मैंने महसूस किया वो लिख दिया हो
सकता है आप सभी लोगों के साथ भी
एसा कुछ घटित हुआ हो
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