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काश का सफर

                
                                                         
                            काश! कुछ ऐसा होता,
                                                                 
                            
समय का पहिया ज़रा पीछे मुड़ जाता।
टूटा हुआ वो रिश्ता फिर से नया हो जाता,
न मुझमें कोई कमियाँ होतीं,
न छोड़ के जाने का कोई बहाना होता।
काश! अगर तुम गले मुझे लगाती,
तो सीने में उठता दर्द महसूस कभी न होता।
काश! अगर मेरे पास तुम होतीं,
तो आज हम तन्हा न होते।
माना कि शिकायतें बहुत हैं तुम्हें मुझसे,
गलती मेरी थी या वक्त की खामियाँ भर गईं मुझमें।
मगर तुझे खोने का डर आज भी तड़पाता है,
वो शिकायतें सुनी होंगी जो अपनों ने तुम्हें बताई हैं।
काश! मैं वो बन पाता जो तुम चाहती थीं,
तो शायद आज आज इतना खालीपन न होता।
काश! कुछ ऐसा होता,
तुम अभी भी मेरे पास होतीं
-प्रेम शंकर
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एक घंटा पहले

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